संसार की चिंता छोड़ भगवान के चरणों में लगाएं मन : प्रेमनारायण

बिजौलिया। श्याम विजय। मनुष्य का मन जब संसार की इच्छाओं और परिस्थितियों में उलझ जाता है तो सुख-दुख उसे प्रभावित करने लगते हैं। ऐसे में यदि मन को भगवान और गुरु के श्रीचरणों में समर्पित कर दिया जाए तो जीवन की विपरीत परिस्थितियां भी विचलित नहीं कर पातीं। संसार में सब कुछ परिवर्तनशील है, जबकि भगवान ही मनुष्य के सच्चे अपने हैं। यह संदेश पंडित प्रेमनारायण गेहूंखेड़ी वालों ने गुरुवार को श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को दिया।

चांदजी की खेड़ी स्थित श्री तिलस्वांनाथ गौशाला में क्षेत्रवासियों के सहयोग से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित हो रही है तथा 4 अक्टूबर को कथा का समापन किया जाएगा। आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भागवत के प्रसंगों के साथ भक्ति, समर्पण और जीवन मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है।

कथावाचक पंडित प्रेमनारायण ने कहा कि अपने इष्ट के श्रीचरणों में किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। जीवन में होनी या अनहोनी जैसी कोई भी परिस्थिति आए, उसका प्रभाव मन की शांति पर नहीं पड़ना चाहिए। भगवान के प्रति विश्वास कायम रहने पर मनुष्य संसार रूपी भवसागर को पार करने की दिशा में आगे बढ़ता है।

उन्होंने कहा कि मन की बात नहीं होने पर दुखी होना और मन की बात हो जाने पर अत्यधिक प्रसन्न होना, दोनों ही मनुष्य को परिस्थितियों से बांधते हैं। व्यक्ति को इन दोनों स्थितियों से ऊपर उठकर सहज भाव रखना चाहिए। उन्होंने संसार को सपना बताते हुए कहा कि इस संसार में स्थायी रूप से अपना कुछ नहीं है, केवल भगवान ही सच्चे अपने हैं।

पंडित प्रेमनारायण ने कहा कि मोह कम होने के साथ ही संसार के बंधनों से मुक्ति का रास्ता खुलता है। यदि मन बार-बार संसार की ओर जा रहा है तो उसे गुरु के श्रीचरणों में समर्पित कर देना चाहिए। गुरु की शरण मन को भटकाव से निकालकर भक्ति और आत्मिक शांति की ओर ले जाती है।

इस अवसर पर गौशाला सेवा समिति अध्यक्ष सुगन धाकड़ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।