भीलवाड़ा। मूलचन्द पेसवानी
नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों को पार्टी का अधिकृत चुनाव चिह्न नहीं मिल पाने का विवाद चुनाव खत्म होने के बाद भी शांत नहीं हुआ है। अब कांग्रेस के प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य मनोज पालीवाल ने जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर चरखा चलाकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह को विरोध का माध्यम बनाते हुए ‘रघुपति राघव राजा राम’ की धुन के बीच धरना दिया और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के इस्तीफे की मांग की।
नगर निगम चुनाव के दौरान भीलवाड़ा के 70 वार्डों में कांग्रेस के 53 प्रत्याशियों को अथॉरिटी लेटर मिला था, जबकि 17 प्रत्याशी पार्टी के अधिकृत चुनाव चिह्न से वंचित रह गए। इस मामले को लेकर संबंधित प्रत्याशियों ने राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन अदालत ने सभी 17 याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद भी कांग्रेस के भीतर इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चरखा लेकर कांग्रेस कार्यालय पहुंचे पालीवाल
पालीवाल ने जिला कांग्रेस कार्यालय के बाहर चरखा रखकर धरना शुरू किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के माध्यम से संघर्ष के प्रतीक रहे हैं और चरखा उनके लिए कार्यकर्ता की आवाज और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का प्रतीक है।
पालीवाल के अनुसार, वे कांग्रेस कार्यालय में गांधीजी की प्रतिमा के सामने बैठकर विरोध करना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां बैठने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद उन्होंने कार्यालय के बाहर ही चरखे के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया।
धरने के दौरान वे चरखा चलाते रहे और ‘रघुपति राघव राजा राम’ की धुन के साथ अपनी मांगें उठाते रहे।
‘17 प्रत्याशियों के सिंबल नहीं मिलने की जिम्मेदारी तय हो’
पालीवाल ने आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल से जुड़े दस्तावेज समय पर जमा नहीं होने से पार्टी को नुकसान हुआ। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
नगर निगम चुनाव में 70 वार्डों में कांग्रेस के 53 प्रत्याशियों को अथॉरिटी लेटर मिला था, जबकि 17 प्रत्याशियों को यह दस्तावेज नहीं मिल पाया। इस मामले को लेकर पालीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तक शिकायत पहुंचाकर जांच की मांग की थी।
इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने 17 प्रत्याशियों की चुनाव चिह्न से संबंधित याचिकाएं खारिज कर दी थीं। अदालत के फैसले के बाद इन 17 वार्डों में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं रहे।
महापौर-उपमहापौर चुनाव को लेकर भी सवाल
पालीवाल ने भीलवाड़ा नगर निगम के महापौर और उपमहापौर चुनाव को लेकर भी प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कांग्रेस की ओर से दोनों पदों के लिए प्रत्याशी नहीं उतारे गए, जिसके चलते दोनों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ।
नगर निगम चुनाव के अंतिम परिणाम में भाजपा ने 70 में से 45 वार्डों में जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। इसके बाद भीलवाड़ा में भाजपा का बोर्ड बना और बाद में भाजपा की जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर तथा राधेश्याम सोमानी निर्विरोध उपमहापौर चुने गए।
पालीवाल इसी पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस संगठन की गंभीर चूक बताते हुए प्रदेश नेतृत्व से जवाब मांग रहे हैं।
डोटासरा के इस्तीफे की मांग
धरने के दौरान पालीवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर गंभीर आरोप लगाए और उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में हुए घटनाक्रम पर प्रदेश नेतृत्व की ओर से अब तक पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
पालीवाल ने डोटासरा को लेकर ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ होने जैसे आरोप लगाए और कहा कि कांग्रेस में संगठनात्मक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नेतृत्व को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
‘जिन पर सवाल, उन्हें पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी क्यों?’
पालीवाल ने आगामी पंचायतीराज चुनाव को लेकर भी पार्टी नेतृत्व को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव के सिंबल प्रकरण में जिन नेताओं की भूमिका पर वे सवाल उठा रहे हैं, उन्हीं में से ओम नरानीवाल और महेश सोनी को पंचायत चुनाव में संगठनात्मक जिम्मेदारियां दी गई हैं।
पालीवाल का कहना है कि नगर निगम चुनाव में सिंबल से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं, ऐसे में पंचायत चुनाव में भी ऐसी किसी चूक की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
उनकी मांग है कि पंचायत चुनाव में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के सिंबल और संबंधित दस्तावेज समय पर निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाए।
नगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने जिलों तक सिंबल पहुंचाने की नई प्रक्रिया अपनाने की घोषणा की थी और प्रत्याशियों को सीधे पार्टी सिंबल देने की रणनीति बनाई थी।
‘पहले यज्ञ किया, अब चरखे के साथ सत्याग्रह’
पालीवाल ने कहा कि उन्होंने पहले भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ‘सद्बुद्धि’ के लिए यज्ञ किया था, लेकिन उनका कहना है कि उससे कोई परिणाम सामने नहीं आया। अब उन्होंने महात्मा गांधी के चरखे को विरोध का माध्यम बनाया है।
उनका कहना है कि यह प्रदर्शन किसी व्यक्तिगत पद या लाभ के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अधिकार और संगठन में जवाबदेही के लिए है।
पालीवाल ने कहा कि वे पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात उठाते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर जयपुर और दिल्ली जाकर राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।
‘धमकियों से नहीं डरूंगा’
धरने के दौरान पालीवाल ने दावा किया कि उन्हें पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से निष्कासन की चेतावनी दी गई है। उन्होंने कहा कि वे इस तरह की चेतावनी से पीछे नहीं हटेंगे और अपनी मांग को राष्ट्रीय नेतृत्व तक ले जाएंगे।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं से फोन पर संपर्क करने और ई-मेल भेजने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
पालीवाल ने कहा कि अब वे आवश्यकता पड़ने पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से व्यक्तिगत मुलाकात कर भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव से जुड़े पूरे मामले को सामने रखेंगे।
‘मांगें नहीं मानी तो भूख हड़ताल’
पालीवाल ने आगे की रणनीति भी स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल करेंगे। इसके बाद दिल्ली कूच कर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी शिकायत रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव से पहले संगठन को पिछले घटनाक्रम से सबक लेते हुए सिंबल वितरण और प्रत्याशियों की अधिकृत प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना चाहिए।
चुनाव के बाद भी जारी है विवाद
भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में 17 कांग्रेस प्रत्याशियों के सिंबल का विवाद अब चुनाव परिणाम के बाद भी पार्टी की अंदरूनी राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट से 17 याचिकाएं खारिज होने के बाद चुनावी स्तर पर मामला भले समाप्त हो गया हो, लेकिन संगठनात्मक जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर पालीवाल लगातार आवाज उठा रहे हैं।
अब पालीवाल के चरखा सत्याग्रह और डोटासरा के इस्तीफे की मांग के बाद यह विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आया है। आगामी पंचायतीराज चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देता है और सिंबल प्रकरण में संगठनात्मक स्तर पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।