होइहि सोइ जो राम रचि राखा…” बायो की यह पंक्ति बन गई अंतिम सत्य, नहीं रहे सीआई लोकपाल सिंह

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भीलवाड़ा। इंस्टाग्राम बायो में लिखी चौपाई “होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥” बुधवार सुबह जैसे जीवन की एक मार्मिक सच्चाई बन गई। भीलवाड़ा के सदर थाना प्रभारी एवं बिजोलिया के पूर्व थानाधिकारी सीआई लोकपाल सिंह ने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पुलिस महकमे के साथ-साथ पूरे भीलवाड़ा जिले, विशेषकर बिजोलिया क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।

जानकारी के अनुसार मंगलवार शाम ड्यूटी पर रवाना होने से पहले वे अपने सरकारी आवास पर वर्दी पहन रहे थे। शाम 7 बजे प्रस्तावित नाकाबंदी के लिए उन्होंने अधीनस्थ अधिकारी को फोन कर वाहन तैयार रखने को कहा था। इसी दौरान उनकी सर्विस रिवॉल्वर से अचानक गोली चल गई, जो कनपटी में लगकर सिर को आर-पार निकल गई। गंभीर हालत में पहले महात्मा गांधी अस्पताल, फिर रामस्नेही हॉस्पिटल ले जाया गया।

बेहतर उपचार के लिए पुलिस प्रशासन ने अभूतपूर्व प्रयास करते हुए भीलवाड़ा से उदयपुर तक 157 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया। पूरे मार्ग पर ट्रैफिक हटाया गया और प्रत्येक थाना क्षेत्र में पुलिस एस्कॉर्ट तैनात रही। इसी वजह से एंबुलेंस महज एक घंटा 35 मिनट में गीतांजलि हॉस्पिटल पहुंच गई, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम पहले से तैयार थी। वेंटिलेटर सपोर्ट पर लगातार उपचार के बावजूद बुधवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।

सीआई लोकपाल सिंह मूल रूप से अजमेर जिले के विजयनगर क्षेत्र के नादसी गांव के निवासी थे। सोशल मीडिया पर माता-पिता के साथ उनकी कई भावुक तस्वीरें मौजूद हैं। सीआई बनने पर उन्होंने अपने माता-पिता के साथ तत्कालीन पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह से बैच पहनकर आशीर्वाद लिया था। वे अक्सर अपने परिवार के प्रति सम्मान और सादगी भरे व्यवहार के लिए भी जाने जाते थे।

बिजोलिया में बनाई थी ‘सिंघम’ जैसी पहचान

लोकपाल सिंह का नाम बिजोलिया में आज भी सम्मान और भरोसे के साथ लिया जाता है। थानाधिकारी रहते हुए उन्होंने कई चर्चित और जटिल मामलों का खुलासा किया। उनके नेतृत्व में पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के उन बदमाशों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने 100 से अधिक लूट, डकैती और नकबजनी की वारदातों को अंजाम दिया था। इस कार्रवाई ने न केवल बड़े अपराधियों की कमर तोड़ी, बल्कि क्षेत्र में अपराधियों के मन में पुलिस का भय भी स्थापित किया।

उनके कार्यकाल में अपराधियों के बीच कानून का खौफ और आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा। यही वजह रही कि बिजोलिया के लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “सिंघम” कहकर पुकारने लगे। उनकी कार्यशैली में सख्ती के साथ मानवीय संवेदनाएं भी झलकती थीं और वे अपने खुशमिजाज स्वभाव के कारण पुलिसकर्मियों व आम लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।

बिजोलिया में भी शोक की लहर

उनके निधन का समाचार मिलते ही बिजोलिया सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधि, व्यापारी, सामाजिक संगठन और आम नागरिक उन्हें एक निडर, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में याद कर रहे हैं।

वर्दी की शान, कानून के प्रति अटूट निष्ठा और जनता की सुरक्षा के लिए समर्पित जीवन जीने वाले सीआई लोकपाल सिंह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका साहस, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेगी। “होइहि सोइ जो राम रचि राखा…”उनकी प्रोफाइल की यह पंक्ति आज हर उस व्यक्ति की आंखें नम कर रही है जिसने उन्हें करीब से जाना।

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