देवडूंगरी को लेकर उमड़ा जनसैलाब: “देवडूंगरी बिजौलिया की, बाहरी का नहीं अधिकार” के नारों से गूंजा कस्बा

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सर्व समाज की एकजुटता का प्रदर्शन, सैकड़ों ग्रामीणों की रैली; बाजार रहा बंद, SDM को सौंपा ज्ञापन

बिजौलिया। देवडूंगरी धार्मिक स्थल को लेकर चल रहे विवाद ने मंगलवार को जनआंदोलन का रूप ले लिया। पंचायत चौक से लेकर उपखंड कार्यालय तक सैकड़ों ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और सामाजिक संगठनों के लोग एकजुट होकर रैली में शामिल हुए। पूरे मार्ग पर “देवडूंगरी बिजौलिया की, बाहरी का नहीं अधिकार”, “सार्वजनिक भूमि बचाओ”, “अतिक्रमण हटाओ” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा। प्रदर्शन के समर्थन में बिजौलिया कस्बे के अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद रहे।

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रैली के बाद ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी स्वाति झा को ज्ञापन सौंपते हुए सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने, माता बांक्या रानी मंदिर निर्माण में आ रही बाधा दूर करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि देवडूंगरी भीलपुरिया की धाटी वर्षों से सर्व समाज की आस्था और श्रद्धा का केंद्र रही है। यहां भगवान श्री देवनारायण मंदिर, श्री हनुमानजी मंदिर, माता बांक्या रानी सहित अन्य देवी-देवताओं के स्थल समाज के सहयोग से विकसित हुए हैं। उनका कहना है कि यह किसी व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों की सार्वजनिक धार्मिक धरोहर है।

‘सार्वजनिक भूमि पर बाहरी लोगों को तवज्जो देने’ का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सामूहिक विवाह सम्मेलन की आड़ में सार्वजनिक भूमि पर निजी अधिकार स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांव की सार्वजनिक भूमि होने के बावजूद बाहरी लोगों को तवज्जो दी जा रही है, जबकि स्थानीय लोगों की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए माता बांक्या रानी मंदिर का निर्माण कार्य रुकवा दिया गया, लेकिन दूसरे पक्ष द्वारा परिसर में किए गए कथित अनाधिकृत आधिपत्य और निर्माण पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विरोध करने पर अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की जाती है।

एक स्वर में उठी कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में ग्रामीणों ने विवादित भूमि का राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर सीमांकन कराने, सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने, मंदिर निर्माण विवाद की निष्पक्ष जांच कराने और भविष्य में किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे व निर्माण पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि देवडूंगरी की धार्मिक और सामाजिक पहचान को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

रैली में शामिल ग्रामीणों ने इसे किसी व्यक्ति या समाज विशेष का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था और सम्मान से जुड़ा विषय बताया। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी भी प्रदर्शन का प्रमुख आकर्षण रही।

प्रशासन बोला- दोनों पक्षों के ज्ञापन मिले, नियमानुसार होगी कार्रवाई

उपखंड अधिकारी स्वाति झा ने बताया कि इस मामले में सर्व समाज के ग्रामीणों के साथ-साथ देवनारायण गुर्जर सेवा संस्थान की ओर से भी ज्ञापन प्राप्त हुआ है। पूरे मामले से जिला कलेक्टर को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवादित भूमि राजकीय भूमि है और वहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण जिला कलेक्टर की नियमानुसार स्वीकृति के बाद ही किया जा सकेगा। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मामले में नियमों के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

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