जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य सरकार और केंद्र की विदेश नीति दोनों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने हालिया विवादों का जिक्र करते हुए मंत्रियों और विधायकों के परिवारजनों, खासकर बेटों की भूमिका पर सवाल उठाए और सरकार को सीधे तौर पर नसीहत दे डाली।
“बेटों को सत्ता से दूर रखो, यही सरकार के हित में”
गहलोत ने कहा कि सरकार बनने के बाद से मंत्रियों के बेटों को जिस तरह से बढ़ावा मिल रहा है, वह चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि परिवार के लोग सत्ता के करीब रहेंगे तो उनकी गतिविधियां सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
उन्होंने सलाह दी बेटों को पास रखोगे तो वे बिगड़ सकते हैं, उन्हें दूर रखकर अच्छे संस्कार देना ही बेहतर है।”
गहलोत ने इशारों-इशारों में कहा कि कई बार नेताओं को यह तक पता नहीं चलता कि उनके परिवारजन कहां और कैसे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन बदनामी सीधे सरकार और पद पर बैठे व्यक्ति की होती है।
विदेश नीति पर भी उठाए सवाल
केंद्र सरकार की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए गहलोत ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक बयान को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है और “दलाली” जैसे शब्द का इस्तेमाल किसी भी विदेश मंत्री को शोभा नहीं देता।
गहलोत ने यह भी कहा कि यदि बयान में चूक हुई है तो मंत्री को माफी मांगनी चाहिए। गहलोत के अनुसार, वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना के प्रयासों को नकारात्मक शब्दों में प्रस्तुत करना भारत की कूटनीतिक छवि के अनुकूल नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय हालात और भारत की स्थिति पर चिंता
गहलोत ने मौजूदा वैश्विक हालात को चिंताजनक बताते हुए कहा कि देश की स्थिति पहले की तुलना में कमजोर नजर आ रही है। उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भारत की अंतरराष्ट्रीय साख मजबूत थी।
उन्होंने मौजूदा परिदृश्य में पाकिस्तान और अन्य देशों के साथ संबंधों पर भी सवाल उठाए और कहा कि आज की वैश्विक स्थिति देश के लिए चिंता का विषय है।
गैस संकट पर सरकार को घेरा
एलपीजी और ऊर्जा संकट को लेकर गहलोत ने कहा कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते तैयारी नहीं की, जिसके कारण अब आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण हालात और बिगड़े हैं, लेकिन सरकार की पूर्व तैयारी की कमी भी जिम्मेदार है।












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