जलाशयों में हादसे रोकने के लिए सरकार सख्त, नई गाइडलाइन जारी ,तालाबों पर अब सख्ती: सेल्फी, शराब और गहरे पानी में कूदने पर प्रतिबंध

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जयपुर। राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों, पोखरों और अन्य जलाशयों में डूबने से होने वाली घटनाओं पर रोक लगाने के लिए पंचायती राज विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। विभाग की ओर से सभी जिला परिषदों को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर आमजन और पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पंचायती राज विभाग के आयुक्त जोगाराम द्वारा जारी निर्देशों में जलाशयों के आसपास जोखिम भरी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को कहा गया है। इसके तहत तालाबों और जलाशयों के किनारे सेल्फी लेना, गहरे पानी में कूदना तथा शराब सेवन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। विभाग का मानना है कि युवाओं द्वारा मनोरंजन के नाम पर उठाए जाने वाले जोखिम अक्सर हादसों का कारण बनते हैं, जिन्हें रोकने के लिए अब स्थानीय स्तर पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य

नई गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक जलाशय के पास स्थानीय भाषा में स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें “गहरा पानी”, “तैरना मना है” और “फिसलन” जैसे संदेश अंकित होंगे। रात के समय दृश्यता बढ़ाने के लिए रिफ्लेक्टिव (चमकने वाले) संकेतकों की व्यवस्था भी की जाएगी।

खतरनाक जलाशयों की होगी बाड़बंदी

गहरे और जोखिमपूर्ण जलाशयों के चारों ओर लोहे की जाली या बाड़ लगाई जाएगी, ताकि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में पानी में न गिर सके। इसके साथ ही फिसलन वाले स्थानों पर रेत डालने और सुरक्षित आवाजाही के लिए पक्की सीढ़ियां व घाट बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

पशुओं के लिए अलग व्यवस्था

पशुधन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जलाशयों पर अलग सुरक्षित घाट बनाए जाएंगे। साथ ही गहरे हिस्सों में आंशिक बाड़बंदी (पार्शियल फेंसिंग) कर पशुओं के फंसने की घटनाओं को रोकने की पहल की जाएगी।

निगरानी और बचाव संसाधन अनिवार्य

ग्राम पंचायतों को अब जलाशयों की नियमित निगरानी के लिए रजिस्टर संधारित करना होगा। इसके अलावा प्रत्येक बड़े जलाशय पर रस्सी, लाइफ जैकेट, बांस तथा फर्स्ट एड किट अनिवार्य रूप से उपलब्ध रखी जाएगी, ताकि आपात स्थिति में तुरंत राहत कार्य किया जा सके।

भीड़भाड़ के समय तैनात होंगे स्वयंसेवक

गाइडलाइन में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि मेलों, त्योहारों या अधिक भीड़ वाले समय में स्थानीय चौकीदारों एवं स्वयंसेवकों की तैनाती की जाए, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।

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